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खीरा (खीरे – Cucumber) की उन्नत खेती

Posted by Yogesh Sharma on

खीरा के प्रकार

सामान्य : स्वर्ण शीतल, स्वर्ण अगेती, पूसा उदय, स्वर्ण पूर्णा, प्वाइनसेट, जापानी लांग ग्रीन, पंत खीरा-1

संकर : पंत संकर खीरा-1, पूसा संयोग, आलमगीर, टेस्टी, नूरी

खीरा

बुवाई

तराई एवं भावर : लौकी के समान
पर्वतीय क्षेत्र 2000 मी. : लौकी के समान
बीज की मात्रा : 3 कि.ग्रा./हैक्टर

रोपाई

100*50 से.मी. कतार से कतार तथा पौधे से पौधे की दूरी रखनी चाहिए।

उर्वरक

खीरे की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 80 कि.ग्रा. नाइट्रोजन, 60 कि.ग्रा. फास्फोरस एवं 60 कि.ग्रा. पोटाश का प्रयोग करें। इसके
साथ-साथ 10 टन/है. सड़ी गोबर की खाद का भी प्रयोग करना चाहिए।

सिंचाई, निराई-गुड़ाई, खरपतवार नियंत्रण : सिंचाई, निराई-गुड़ाई तथा खरपतवार नियंत्रण लौकी के समान करें।

कीट एवं व्याधि नियंत्रण

लौकी के अनुसार करें। उकठा रोग के नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम के 1.0 ग्रा. से प्रति किग्रा. बीज शोधित करके बोना चाहिए। फसल चक्र
अपनाना चाहिए।

उपज : 150 कु./है. पैदावार प्राप्त होती है।


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